The Morning Part -1 | #सुबह
सर्दियों की एक खूबसूरत सुबह में कपिल अपने सुनहरे सपनों में खोया हुआ है, किसी के बड़बड़ाने की धीमी सी आवाज उसके कानों में पड़ रही है जो अब धीरे धीरे तेज हो चली है, अचानक किसी ने एक झटके से चादर खींचा और कपिल की नींद टूटी, उसे समझ आ गया था ये बड़बड़ाने की आवाज सपने से अलग उसकी मां की ही थी।
माँ ने तमतमाते लहजे में कहा बस सो सो कर सारा जीवन बर्बाद कर लिया, कुछ बाप ने कर लिया कुछ तुम कर लो अब। ये कपिल की मां का रोज का डायलॉग है जब भी वो कपिल को जगाती हैं, कपिल मन ही मन ये सारी लाइनें उनके साथ साथ ही दोहराया करता, और अब वो चिकना घड़ा हो चुका है।
सूती चादर तो माँ ले गयी अब बेबसी की चादर ओढ़े हमारी कहानी का हीरो उठता है।
जिंदगी के लगभग 23 सालों तक कपिल की यही दिनचर्या रही अब यहाँ लगभग इसलिए क्योंकि वह पहले ऐसा बिल्कुल नहीं था, एक मेधावी छात्र होने के साथ साथ वह विलक्षण प्रतिभा का धनी था, सारा बचपन "कल्याण" समझ झरोखा, चंपक, पंचतंत्र की कहानियां पढ़कर बिताने वाला वो अपने घर का इकलौता ही लड़का है.
ईमानदारी, सदाचार, शिष्टाचार, विनम्रता, और ऐसे ही अनगिनत गुणों से अलंकृत यह लड़का बेहद भावुक भी है।
पर अब वो मेधावी छात्रों की श्रेणी से बाहर निकाल दिया गया था जिस प्रकार घी में गिरी मक्खी को कोई निकाल फेंकता है।
Part 2-
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